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आसमां तक…

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चमकीले से ख्वाब थे आज ख़ाली हैं वो आँखें
हसरत कोई आँसूओं में कभी बह गया होगा.
***
न चाहतें रहीं न अरमानों का परवाज़ ही
वक़्त का परिंदा चुपके से उड़ गया होगा.
***
कभी आबाद था आज वीरां हैं हर गली कूचा
बड़ी बेबसी में किसीने इस शहर को छोड़ा होगा.
***
फ़रियाद न किया न ही शिकवा ही किसी ने
शोर था आहों का, आसमां तक गया होगा .
***
यूँ ही फिज़ा में दर्द के रंग घुलते नहीं
जरुर दिल किसीका टूटकर बिखरा होगा .
***

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21 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

निशिका गौड़ के द्वारा
June 28, 2012

हर शब्द को बेहद खूबसूरती से पिरोया है आपने रजनी जी.. दिल को छूनेवाली ग़ज़ल..

rajanidurgesh के द्वारा
June 27, 2012

रजनी वाह, लेखनी में ता जादू भरल अछि. अति उत्तम. बहुत दर्द भरल आ मार्मिक!

    Rajni Thakur के द्वारा
    June 28, 2012

    अहांक प्रतिक्रिया देखक मोन प्रसन्न भा गेल, बहुत धन्यवाद.

yogi sarswat के द्वारा
June 23, 2012

कभी आबाद था आज वीरां हैं हर गली कूचा बड़ी बेबसी में किसीने इस शहर को छोड़ा होगा. बहुत सुन्दर अल्फाज़ आदरणीय रजनी ठाकुर जी ! बहुत सुन्दर

    Rajni Thakur के द्वारा
    June 23, 2012

    धन्यवाद योगी जी, इतनी सुन्दर प्रतिक्रिया के लिए.

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
June 23, 2012

बहुत सुन्दर गजल,रजनी जी. यूँ ही फिज़ा में दर्द के रंग घुलते नहीं जरुर दिल किसीका टूटकर बिखरा होगा . बहुत सुन्दर पंक्तियाँ.

    Rajni Thakur के द्वारा
    June 23, 2012

    प्रतिक्रिया हेतु बहुत धन्यवाद राजीव जी, मेरा लेखन सार्थक हुआ

pritish1 के द्वारा
June 22, 2012

नमस्ते……..रजनी जी आपके गजल मैं टूटने और बिखरने का आभाष अत्यंत सुन्दर प्रतीत हो रहा है….. गजल मैं किसी ने फरियाद तो नहीं की……..किन्तु फरियाद तो थी तब तो दिल टूटकर बिखरा होगा मेरे ब्लॉग पर आप सादर आमंत्रित हैं……………..

    pritish1 के द्वारा
    June 22, 2012

    मैं इतना योग्य नहीं की आपको मार्गदर्शन दे सकूँ………मैंने बस गजल की अभिव्यक्ति के विषय में लिखने का प्रयत्न किया है………. मेरी कहानियां पढें………मुझे सुझाव दें………… मेरा नया पोस्ट मैं एक किसान हूँ……..भारतीय किसानों को समर्पित है……..जिनके अथक परिश्रम से हमें भोजन मिलता है………. आपके विचारों एवं सुझावों की प्रतीक्षा में

    pritish1 के द्वारा
    June 22, 2012

    मैं इतना योग्य नहीं की आपको मार्गदर्शन दे सकूँ………मैंने बस गजल की अभिव्यक्ति के विषय में लिखने का प्रयत्न किया है………. मेरी कहानियां पढें………मुझे सुझाव दें………… मेरा नया पोस्ट मैं एक किसान हूँ……..भारतीय किसानों को समर्पित है……..जिनके अथक परिश्रम से हमें भोजन मिलता है………. आपके विचारों एवं सुझावों की प्रतीक्षा में…………..

    Rajni Thakur के द्वारा
    June 23, 2012

    प्रीतिश जी बेआवाज ही दिल अक्सर टूट जाते हैं तो बंद होठों से भी फरियाद चली जाती है ! प्रतिक्रिया हेतु बहुत धन्यवाद.

nish के द्वारा
June 22, 2012

यूँ ही फिज़ा में दर्द के रंग घुलते नहीं जरुर दिल किसीका टूटकर बिखरा होगा . बहूत खूब हर शेर लाजबाव …………. अनुपम…………..

    Rajni Thakur के द्वारा
    June 23, 2012

    निशांत जी, आपने तो जी भरकर तारीफ़ कर दी, इस अनुपम प्रतिक्रिया के लिए बहुत धन्यवाद.

R K KHURANA के द्वारा
June 22, 2012

प्रिय रजनी जी, कभी आबाद था आज वीरां हैं हर गली कूचा बड़ी बेबसी में किसीने इस शहर को छोड़ा होगा. बहुत ही सुंदर ग़ज़ल लिखी है आपने ! दिल खोल कर रख दिया है ! लेकिन याद रखिये — जाती हुई डोली को न आवाज लगा इस गाँव में सब आये हैं जाने के लिए ! सुंदर ग़ज़ल के लिए बधाई ! राम कृष्ण खुराना

    Rajni Thakur के द्वारा
    June 23, 2012

    आदरणीय खुराना जी, आपकी प्रतिक्रिया देखकर लगा कि मेरा ग़ज़ल लिखने का यह प्रयास सार्थक हुआ.. मेरा हौसला बढ़ने के लिए हार्दिक धन्यवाद देना चाहूंगी .

Kiran raj के द्वारा
June 22, 2012

बेहतरीन ग़ज़ल के लिए बधाई..रजनी जी, मुझे तो लगा आप ज्योतिष आलेखों में ही दखल रखती हैं !

    Rajni Thakur के द्वारा
    June 23, 2012

    किरण जी, शुरुआत तो यहीं से की थी :) प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद

dineshaastik के द्वारा
June 22, 2012

यूँ ही फिज़ा में दर्द के रंग घुलते नहीं जरुर दिल किसीका टूटकर बिखरा होगा . वाह रजनी जी वाह…बहुत खूबसूरत……

    Rajni Thakur के द्वारा
    June 23, 2012

    दिनेश जी, प्रतिक्रिया हेतु धन्यवाद एवं आभार.

seemakanwal के द्वारा
June 21, 2012

खुबसूरत शेर रंजीताजी ,आँखों में जो रखोगे तो किरचें सी चुभेंगी ,ये ख्वाब तो पलकों पे सजाने के लिए हैं

    Rajni Thakur के द्वारा
    June 23, 2012

    बहुत खूब सीमा जी … पर वो क्या करे जिनके ख्वाब पलकों से उतरकर आँखों में और फिर दिल में जा बसते हैं !


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