kuchhkhhash

Just another weblog

33 Posts

566 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 3598 postid : 244

ऐसे बनेगा भाग्य ?

Posted On: 17 Jun, 2012 Others में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

102_1496 विज्ञान के चमत्कारों ने हमारी आँखें कुछ इस तरह चौंधिया दी हैं कि सही गलत के निर्णयों से परे हममें यह मानसिकता घर करती जा रही है कि सबकुछ संभव है और हमारी मुट्ठी में है | अब यह मानसिकता प्रकृति के नियमों को भी ताक पर रख चुकी है |
ज्योतिषशास्त्र पर विश्वास करनेवाले जन्म कुंडली के महत्त्व से अच्छी तरह परिचित हैं | अधिकांश लोग कुंडली को किसी चमत्कारपूर्ण पुस्तिका से कम नहीं समझते वहीँ इसे भाग्य निर्माण का एक माध्यम भी मान बैठते हैं | वस्तुतः कुंडली कोई चमत्कार नहीं करती वरन यह पूर्व जन्म के संचित कर्मों का लेखा जोखा दिखाती है | जहाँ तक भाग्य की बात है तो वह इन कर्मों के साथ देश, काल, पात्र और संस्कारों पर भी निर्भर करता है |
अथक प्रयास एवं परिश्रम के बूते भी भाग्य निर्माण की चेष्टा समझ में आती है परन्तु ग्रह नक्षत्रों व् योगों की उत्तम स्थिति के आधार पर अपने संतान जन्म की तारीख व् समय तय करना – यह प्रकृति के खिलाफ एक दुस्साहसिक कदम ही कहा जाएगा और ऐसा कदम कल्याणकारी नहीं हो सकता !
बच्चे के जन्म का स्वनिर्णित तारीख व् समय के आधार पर तैयार की गई कुंडली भविष्य के शुभ- अशुभ समय की सही जानकारी नहीं दे सकता | कारण स्पष्ट है, स्वनिर्णित कुंडली के आधार पर हम बच्चे के पूर्व सिंचित फल एवं पिछली पीढ़ियों के कर्म फल में रत्ती भर बदलाव नहीं ला सकते | ऐसे में विकट स्थिति तब लगती है जब आवश्यकता पड़ने पर कुंडली की सही जाँच नहीं हो पाती और न ही भविष्य में घटने वाली प्रतिकूल परिस्थितियों का अंदाजा ही मिल पाता है, जिसका समय रहते ज्योतिषीय उपचार किया जा सकता था !
समय रहते प्रतिकूल परिस्थितियों की समुचित जानकारी- यह कुछ ऐसा ही है जैसे घर से निकलने से पहले ही अगर बारिश का अनुमान हो जाए तो छतरी साथ लेकर निकल सकते हैं| ज्योतिषीय उपचार यानि घनघोर बारिश में छतरी 100 फीसदी सुरक्षा न दे न सही, फिर भी भीगने से काफी हद तक बचा ही लेगा |
आवश्यकता पड़ने पर सिजेरियन प्रसव आज कोई नयी बात नहीं रह गई पर इस माध्यम से भाग्यशाली संतान पाने के लिए उसके भाग्य का निर्णय स्वयं लेने की चेष्टा करना- यह प्रकृति के नियमों से खिलवाड़ से ज्यादा और कुछ भी नहीं ! ऐसे तो हर घर में आसानी से ईश्वर का अवतार हो जाएगा !

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (4 votes, average: 3.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

18 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Mohinder Kumar के द्वारा
June 20, 2012

रजनी जी, ज्योतिष शास्त्र भी एक तरह का विज्ञान ही है और इसे पूरी तरह से नाकारा नहीं जा सकता… और उस अवस्था में तो बिल्कुल नहीं जब इसको पूर्ण रूप से जानने वाले ने कुंडली बनाई हो. नीम हकीम तो किसी भी रूप में जान को जोखिम में डाल सकते हैं. पुरातन काल में राजा महाराज इसी विद्या के बलबूते पर मनचाही संतान प्राप्त करते थे. बस बात इतनी है कि उस समय इस विद्या के जानकार लोग थे.. आज नीम हकीम ज्यादा हैं. विचारों को साझा करने के लिये आभार.

    Rajni Thakur के द्वारा
    June 20, 2012

    सही कहा आपने मोहिंदर जी, अधकचरी जानकारी हमेशा घातक होती है चाहे वो किसी भी व्यसाय से सम्बंधित हो.

R K KHURANA के द्वारा
June 19, 2012

प्रिय रजनी जी, अच्छी जानकारी ! बधाई राम कृष्ण खुराना

    rajni thakur के द्वारा
    June 19, 2012

    प्रतिक्रिया हेतु धन्यवाद एवं आभार

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
June 19, 2012

सुन्दर आलेख, रजनी जी.

    rajni thakur के द्वारा
    June 19, 2012

    आलेख पसंद आई तो मेरा लेखन सार्थक हुआ. धन्यवाद राजीव जी

VIVEK KUMAR SINGH के द्वारा
June 18, 2012

बहुत अच्छा लेख |

    rajni thakur के द्वारा
    June 19, 2012

    प्रतिक्रिया हेतु धन्यवाद विवेक जी

rajanidurgesh के द्वारा
June 18, 2012

रजनीजी आपने सही लिखा है. प्रकृति से खिलवाड़ करना आज के लोगों की फितरत हो गई है. प्रकृति भी उस खिलबाड़ का जबाब दे रही है या समय आने पर देगी. जबाब जरूर मिलेगा. समाया रहते चेतना बहुत जरूरी है. डा.रजनी.

    rajni thakur के द्वारा
    June 19, 2012

    सही कहा दीदी आपने.. उलटी गिनती तो कब की शुरू हो चुकी है और प्रकृति जवाब दे भी रही है. आपकी प्रतिक्रिया देखकर बेहद ख़ुशी हुई.

yogi sarswat के द्वारा
June 18, 2012

हम हर काम में जब प्रकृति के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं , और उसका बदला प्रकृति समय समय पर हमसे ले भी रही है ! ये तो विज्ञानं है ! आप ऊपर अपने लेख में ज्योतिष की तारीफ कर रही हैं , फिर एकदम से बदलाव कैसे ?

    rajni thakur के द्वारा
    June 18, 2012

    ज्योतिष भी एक विज्ञानं ही है योगी जी जिसके पुख्ता आधार हैं, चौराहों पे बैठकर तोते के सहारे भविष्यवाणी करने वाले ज्योतिष नहीं है . ग्रह नक्षत्र एवं उनकी गति का आकलन महज कोरी बातें नहीं है बल्कि उनका एक खगोलीय एवं वैज्ञानिक आधार है, जिसपर ज्योतिषशास्त्र टिका हुआ है .

dineshaastik के द्वारा
June 18, 2012

आदरणीय रजनी जी, ज्योतिष  पर अच्छा व्यंग….आभार…. ज्योतिष, जन्मपत्री, भाग्य, मुहूर्त  आदि कुटिल  बुद्धि के लोंगो द्वारा धनोपार्जन  के लिये बनाया गया एक  तरह का व्यापार है।

    Rajni Thakur के द्वारा
    June 18, 2012

    दिनेशजी, यह आलेख ज्योतिष पर व्यंग्य नहीं है बल्कि उन लोगों को सीख देने की चेष्टा है जो यह समझते हैं कि बच्चे का जन्म अपनी मनोवांछित मुहूर्त में करवाकर वह बच्चे की किस्मत बदल सकते हैं ! और यह काम आजकल धड़ल्ले से किया जा रहा है, ज्योतिषीय दृष्टिकोण की बात न भी करें तो स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी यह गलत है.

चन्दन राय के द्वारा
June 17, 2012

रजनी जी , में खुद किसी कुंडली ,नक्षत्र ,ग्रह दशा को नहीं मानता , में विज्ञान को आवश्यकता तक देखता हूँ , पर हाँ इंसानियत इन सब से ऊपर है

    Rajni Thakur के द्वारा
    June 18, 2012

    चंदनजी, इंसानियत तो सर्वोपरि है ही पर यह भी सही है कि ज्योतिषशास्त्र हमारी प्राचीनतम धरोहर एवं विधाओं में से एक है जिसका मजबूत आधार भी है. ये बात अलग है कि आजकल के कुछ झोलाछाप ज्योतिषियों ने इस विधा को कहीं का नहीं छोड़ा !

pritish1 के द्वारा
June 17, 2012

नमस्ते आपके लेख से प्रभावित हूँ मेरे नवीनतम ब्लॉग पर आपका स्वागत है…..मेरी कहानियां ऐसी ये कैसी तमन्ना है…….१ और ऐसी ये कैसी तमन्ना है…….२ का आनंद लें अपने विचारों से मुझे अवगत करायें धन्यवाद……!

    Rajni Thakur के द्वारा
    June 18, 2012

    प्रतिक्रिया हेतु धन्यवाद प्रीतिश जी.


topic of the week



latest from jagran